जिम ट्रेनर फर्जी मुठभेड़ मामला / मानवाधिकार आयोग ने योगी सरकार को दिया निर्देश, पीड़ित परिवार को दी जाए पांच लाख रुपए की सहायता

लखनऊ. आठ माह पहले नोएडा में फर्जी मुठभेड़ में मारे गए जिम ट्रेनर के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपए की सहायता दिए जाने की सिफरिश की है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को छह हफ्ते के भीतर भुगतान प्रमाण के साथ अनुपालन रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है।
इस प्रकरण में आयोग ने पांच फरवरी को मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दायर कराया था। पूछताछ और सूचनाओं के जवाब के दौरान यूपी सरकार ने आयोग को बताया कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि हुई थी। दोषी एसआई के खिलाफ चार्ज शीट जमा की गई है। एक दरोगा और दो कांस्टेबल समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

यह है पूरा मामला: नोएडा में जिम चलाने वाले जितेन्द्र यादव अपने चाचा और अन्य दोस्तों के साथ बीते तीन फरवरी की रात गाजियाबाद से अपनी बहन की सगाई कर लौट रहे थे। आरोप है कि सेक्टर 122 में चौकी इंचार्ज विजयदर्शन शर्मा ने तीन अन्य सिपाहियों के साथ जितेन्द्र की गाड़ी को ओवरटेक कर रोका। चौकी इंचार्ज ने जितेन्द्र के साथ गालीगलौज करते हुए मारपीट की और गोली मार दी। अस्पताल में जितेंद्र यादव ने दम तोड़ दिया था।

रंजिशन दरोगा ने मारी गोली: जितेन्द्र के परिजनों ने आरोप लगाया कि चौकी इंचार्ज विजयदर्शन घटना के वक्त नशे में था और उन्होंने जितेन्द्र पर बंदूक तानते हुए कहा कि प्रमोशन का सीजन है और उनका प्रमोशन रह गया है एक-दो को टपकाना पड़ेगा। वहीं गांववालों ने आरोप लगाया कि इस घटना के 10-12 दिन पहले कुछ पुलिसकर्मी पास की मार्केट में उगाही करने आए थे, जिसको लेकर जितेन्द्र का चौकी इंचार्ज से विवाद भी हुआ था। इस खुन्नस में चौकी इंचार्ज ने उसे गोली मारी।

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