स्वस्थ महिला ही करेंगी स्वस्थ समाज का निर्माण

स्वस्थ महिला ही स्वस्थ समाज का करेगी निर्माण-राजीव।
विश्व मासिक धर्म दिवस के अवसर पर सीएचसी मवई की टीम द्वारा कस्तूरबा गांधी विद्यालय में किया गया गोष्ठी का आयोजन।
गोष्ठी के माध्यम से स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं ने छात्राओं को स्वच्छता के प्रति किया प्रेरित।

[विश्व मासिक धर्म दिवस]
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मवई(फैज़ाबाद) ! विश्व मासिक धर्म दिवस के उपलक्ष्य पर सीएचसी अधीक्षक डा0 रविकान्त वर्मा की अगुवाई में सोमवार को मवई ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।इस मौके पर मवई सीएचसी के स्वास्थ्य काउंसलर डॉ राजीव कुमार यादव ने कहा कि इस दिवस को मनाने का मकसद है कि हमारी मां,बहनें व बेटियां कैसे स्वच्छ और स्वस्थ्य रहें।उनके अंदर की हिचक को दूर किया जा सके।क्योंकि एक स्वस्थ्य महिला ही रहकर एक स्वस्थ्य समाज का निर्माण कर सकती है। इस स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का एक महत्वपूर्ण कदम है- मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता जरूरी है।

गोष्ठी में काउंसलर ने बताया कि मासिक धर्म एक प्रक्रिया है, जो महिलाओं में 28 से 30 दिन पर आती है। जो 4 से 5 दिनों तक रहता है। हर लड़कियां जब 11 से 12 साल की होती है, तो उस समय इस सर्किल के शुरूआत होने का समय आता है। यही समय है जब लड़कियों को इस संबंध में उचित सलाह देकर जागरूक किया जाए।परिणामस्वस्प वे सर्किल के दौरान स्वच्छता बनाए रहे।इस जागररूकता में सबसे बड़ी भागदारी उस घर की मां,बड़ी बहन एवं स्कूल की शिक्षिकाओं का है।मासिक के समय कैसे रहा जाए।क्या उपयोग किया जाए और क्या नहीं किया जाए। इन सब के प्रति सतर्क एवं सजग करना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस संबंध में खुलकर आपस में बात होनी चाहिए।मासिक धर्म के समय स्वच्छता बनाए रखे।मासिक के दौरान हमेशा सेनेट्री पैड या साफ कपड़ा का उपयोग करें।दिन में कम से कम दो बार बदले।उस कपड़ा का दूबारा उपयोग ना करें।स्वच्छता नहीं रखने से उस दौरान बहुत सारा इन्फेक्शन लगने का भय रहता है। जिससे पीआईडी और बच्चेदानी के नली और अंदरूनी भाग को छतिग्रस्त करता है।महिलाएं बांझपन का शिकार हो सकती है और वे संतान सुख से वंचित होने का भी डर रहता है।उन्होंने कहा कि समाज में एक अंधविश्वास व्याप्त है कि मासिक आना एक अपवित्र चीज है।पर हकीकत यह है कि यह पवित्र चीज है,और हर स्त्री के जिंदगी का यह अहम हिस्सा है।यों कहिए यह स्त्रीत्व का प्रमाण है।इस दौरान अच्छे से साफ रहना चाहिए।स्नान करना चाहिए।उचित आहार लेना चाहिए, लड़कियों को स्कूल जाना चाहिए और रोजमर्रा का हर काम अन्य दिनों के तरह ही करना चाहिए।उन्होंने कहा कि विश्व मासिक धर्म दिवस की शुरूआत वर्ष 2014 से हुई थी।प्रधानमंत्री का हर घर शौचालय, हर विद्यालय शौचालय अभियान भी इस कार्य में बहुत मददगार है,क्योंकि प्राय: लड़कियां इन दिनों में स्कूल जाना बंद कर देती थी।जो आज शौचालय उपलब्ध होने के कारण अब बंद नहीं करती है।इस दौरान डॉ पारुल डॉ आशा ने भी छात्राओं को जानकारियां दी।इस मौके पर विद्यालय की प्रधानाध्यपिक बिंदु कुमारी सहित अन्य स्टॉफ मौजूद रही।इस दौरान वहां मौजूद सभी छात्राओं को नेफकीन भी वितरित किया गया।

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