सावन के पहले सोमवार को शिव आराधना में रखें मन, वचन और कर्म की शुद्धता
जलाभिषेक के साथ अहिंसा का संकल्प जरूरी, श्रद्धा-विश्वास से करें भोलेनाथ का पूजन : आचार्य अर्जुन तिवारी।

व्रत-पूजन से मन की शांति, आत्मसंयम और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता, शिव मंत्र जाप से भक्तिमय होता है वातावरण।
अयोध्या। सावन मास का पहला सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन शिवालयों में हर-हर महादेव और ॐ नम: शिवाय के जयघोष गूंजते हैं। श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत और श्रद्धा से किया गया शिव पूजन मन को शांति देता है और साधक में आत्मसंयम, धैर्य एवं सकारात्मकता का भाव बढ़ाता है।श्रीमद्भागवत एवं श्रीरामकथा प्रवक्ता और संकटमोचन हनुमान मंदिर बड़ागांव के संरक्षक आचार्य अर्जुन तिवारी ने बताया कि भगवान शिव की पूजा केवल विधि-विधान पूरा करने तक सीमित नहीं है। पूजन से पहले साधक को मन, वचन और कर्म से अहिंसा का पालन करने का संकल्प लेना चाहिए। किसी के प्राण लेना ही हिंसा नहीं है, बल्कि किसी को मन से दुख पहुंचाना, कटु वाणी बोलना या कर्म से कष्ट देना भी हिंसा की श्रेणी में आता है।

क्रोध, लोभ और अहंकार से बचना जरूरी
आचार्य अर्जुन तिवारी ने कहा कि शिव आराधना करते समय काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से दूर रहना चाहिए। कई बार लोग पूजा-अनुष्ठान तो करते हैं, लेकिन छोटी-छोटी बातों पर परिवार के सदस्यों या आसपास के लोगों पर क्रोध कर बैठते हैं। इससे पूजा की सात्विक भावना प्रभावित होती है। इसलिए भगवान शिव की पूजा के साथ अपने आचरण को भी शुद्ध रखना जरूरी है।उन्होंने कहा कि “भगवान शिव बड़े भोले हैं, उन्हें अपना मन अर्पित कर देना चाहिए। मन, वाणी और कर्म से स्वयं को समर्पित करने वाला साधक भगवान शिव की कृपा का अधिकारी बनता है।”
व्रत से बढ़ता है आत्मसंयम
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन सोमवार का व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि इंद्रियों और मन पर नियंत्रण का अभ्यास भी है। व्रत के दौरान सात्विक आहार, संयमित व्यवहार, शिव मंत्र का जाप और सेवा-दान जैसे कार्यों से मन को एकाग्र करने में सहायता मिलती है। श्रद्धालु भगवान शिव से सुख-शांति, आरोग्य, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। मान्यता है कि नियमित श्रद्धा से व्रत रखने से मन में धैर्य और सकारात्मक विचारों का विकास होता है।
ऐसे करें सोमवार को शिव पूजन
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ करने के बाद शिवलिंग का गंगाजल या स्वच्छ जल से अभिषेक करें। सामर्थ्य के अनुसार दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक कर बेलपत्र, पुष्प, अक्षत, चंदन और धतूरा अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर भगवान शिव का ध्यान करें। इसके बाद शिव चालीसा, शिव स्तुति या रुद्राभिषेक का पाठ किया जा सकता है।
‘ॐ नम: शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप
पूजन के दौरान ‘ॐ नम: शिवाय’ पंचाक्षरी मंत्र का जाप किया जाता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शिव आराधना में विशेष महत्व रखता है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
आचार्य अर्जुन तिवारी के अनुसार शिव पूजन में श्रद्धा और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण हैं। शरीर पूजा में हो और मन दूसरी ओर भटकता रहे तो साधना का भाव कमजोर हो जाता है। इसलिए सावन के पहले सोमवार पर भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ अपने मन, वाणी और कर्म को भी सात्विक बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
धार्मिक मान्यता: व्रत और पूजन से मिलने वाले लाभ आस्था एवं परंपराओं पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य आध्यात्मिक अनुशासन, आत्मसंयम और भक्ति की भावना को बढ़ाना है।

