चौपाल : सनातन धर्म में वैसे तो समय-समय पर पर्व एवं त्यौहार मनाए जाते रहते हैं , परंतु कार्तिक मास में पांच त्योहार एक साथ उपस्थित होकर के पंच पर्व या पांच दिवसीय महोत्सव मनाने का दिव्य अवसर प्रदान करते हैै | आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन से प्रारंभ होकर के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तक दिव्य पर्वों का मेला लगता है | इसी क्रम में आज आयुर्वेद के आदि आचार्य भगवान धन्वंतरि की जयंती पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है | आज के दिन को धनतेरस के नाम से भी माना जाता है | जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन प्रारंभ किया तो उसमें चौदह दिव्य रत्न प्रकट हुए | इन्हीं चौदह रत्नों के अंतर्गत स्वयं भगवान नारायण अपने अंश के साथ धनवंतरी के रूप में हाथ में अमृत का दिव्य कलश लेकर के प्रकट हुये | आज के दिन भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के कारण ही “धन्वंतरि जयंती” मनाई जाती है | धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है | जो भी धनतेरस की सांध्यबेला पर यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर रखते हुए यम के लिए दीपदान करता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है | इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आँगन में यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं और यम देवता के नाम पर व्रत भी रखते हैं।आज जहां सब कुछ बदल रहा है वहीं पर्वों का स्वरूप भी बदल गया है | आज के लोग धन्वंतरि जयंती को मात्र आभूषण या बर्तन खरीदने का त्यौहार मात्र मानने लगे हैं | महिलाएं आज के दिन की वर्षों प्रतीक्षा किया करती है और आज के दिन अपने लिए नए आभूषण , गृहस्थी के लिए नए बर्तन एवं पुरुष वर्ग आज के दिन ही अपने लिए नये वाहन खरीदने को इच्छुक रहते हैं | आज के परिवेश में बहुत कम ही लोग धन्वंतरि जयंती या धनतेरस के विषय में जानते हैं और दुखद तो यह है कि वह जानना भी नहीं चाहते हैं | आज के दिन बर्तन क्यों खरीदे जाते हैं इसके विषय में मैं “आचार्य अर्जुन तिवारी” बताना चाहूंगा कि हमारे पौराणिक ग्रंथों में यह वर्णन मिलता है की धनवंतरी जी का प्राकट्य हाथ में कलश लेकर के हुआ है , इसीलिए बर्तन खरीदने की परंपरा बनी | प्राय: लोग आज के दिन चांदी खरीदते हैं | चांदी खरीदने के पीछे रहस्य यह है की चांदी चंद्रमा का प्रतीक है इसे घर लाने से घर में सुख एवं शांति सौम्यता एवं शीतलता विद्यमान रहती है , और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है।संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है।जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है।भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है।लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं।प्रत्येक मनुष्य को अपना शरीर निरोगी रखने की कामना से भगवान धन्वंतरि का पूजन एवं अकालमृत्यु से बचने के लिए यमराज के लिए दीपदान अवश्य करना चाहिए।

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