चौपाल परिवार की ओर आज का प्रात: संदेश में आप भी पढ़े “गंगा दशहरा पर विशेष” लेखक-आचार्य अर्जुन तिवारी

साथियों ! विशाल देश भारत में सनातन धर्म का उद्भव हुआ।सनातन धर्म भिन्न-भिन्न रूपों में समस्त पृथ्वीमंडल पर फैला हुआ है,इसका मुख्य कारण यह है कि सनातन धर्म के पहले कोई धर्म था ही नहीं,आज इस पृथ्वी मंडल पर जितने भी धर्म विद्यमान हैं वह सभी कहीं न कहीं से सनातन धर्म की शाखाएं हैं,सनातन धर्म इतना व्यापक एवं आनंददायक हैं कि यहां प्रतिदिन भारत के विभिन्न अंचलों में अनेक पर्व एवं त्योहार मनाने का अवसर मिलता है।शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन सनातन धर्म के अनुसार कोई पर्व या त्यौहार ना पड़ता हो , और सबसे विशेष बात यह है की हमारे प्रत्येक पर्व एवं त्योहारों के पीछे पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।इसी क्रम ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को पूरे देश में “गंगा दशहरा” का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को संवत्सर का मुख कहा गया है , इसलिए इस दिन दान और स्नान का ही अत्यधिक महत्व है। “वराह पुराण” के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, बुधवार के दिन, हस्त नक्षत्र में गंगा जी स्वर्ग से धरती पर आई थी। इस पवित्र नदी में स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट होते है राजा भगीरथ की तपस्या के बाद जब गंगा माता धरती पर आती हैं उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी थी। गंगा माता के धरती पर अवतरण के दिन को ही “गंगा दशहरा” के नाम से पूजा जाना जाने लगा।इस दिन गंगा नदी में खड़े होकर जो गंगा स्तोत्र पढ़ता है वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है।”स्कंदपुराण” के अनुसार गंगा दशहरे के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी पर जाकर स्नान, ध्यान तथा दान करना चाहिए , इससे वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है | यदि कोई मनुष्य पवित्र नदी तक नहीं जा पाता तब वह अपने घर के पास की किसी भी नदी पर स्नान कर ले तो वही पुण्य प्राप्त कर लेता है।आज हम पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने में इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने देश की मान्यताओं एवं अपनी संस्कृति / धरोहर एवं पर्व / त्योहारों को भूलते चले जा रहे हैं | आज हमें विदेशों में मनाए जाने वाले नववर्ष , फादर्स डे , मदर्स डे , वूमंस डे तो याद रहते हैं परंतु अपने पौराणिक महत्व के पर्व एवं विशेष दिनों को हम याद नहीं रख पाते | भौतिकता की अंधी दौड़ में हम इस प्रकार लाइन लगाकर खड़े हो गए कि हमें यही चिंता मुख्य रूप से रहती है कि हम आगे कैसे निकलें | मेरा “आचार्य अर्जुन तिवारी” का विचार है कि प्रत्येक मनुष्य को निरंतर आगे बढ़ते रहने का प्रयास करते ही रहना चाहिए परंतु इसके साथ यह भी आवश्यक है कि हम अपनी संस्कृति , संस्कार एवं सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रत्येक पर्व एवं त्योहारों के विषय में जानकारी रखें | आज स्थिति यह है कि शायद ७५% लोगों को यह नहीं याद होगा आज कौन सा पर्व है | इसके लिए किसे दोषी माना जाए यह निर्णय कर पाना थोड़ा कठिन है | आवश्यकता है स्वयं को , स्वयं के धर्म को एवं धर्म आधारित पौराणिक मान्यताओं को जानने की | आज समाज में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव इतना ज्यादा हो गया है कि आज की युवापीढ़ी स्वयं को सनातन धर्मी बताने में भी संकोच करने लगे हैं | यदि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में हम यह भी भूल जाएंगे कि हम सनातन हिंदू हैं या कोई और ?? इसलिए प्रत्येक सनातन धर्मी को इतना ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि हम क्या हैं ? हमारा धर्म क्या है ? और हमारे पर्व और त्योहार कैसे और क्यों मनाए जाते हैं ?

आज के ही दिन समस्त मानव जाति के कल्याण के लिए जगत जननी , जीवनदायिनी मैया गंगा इस धरा धाम पर पधारीं।इसीलिए आज के दिवस को “गंगा दशहरा” के रूप में मनाया जाता है।

आचार्य अर्जुन तिवारी
प्रवक्ता-श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा
संरक्षक-संकटमोचन हनुमानमंदिर
बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी (उत्तर-प्रदेश)
मो0 न0-9935328830

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