राजनाथ पर कूटनीतिक प्रहार! पहले मोदी दूजे शाह सरकार?

उत्तर भारत व देश के ताकतवर नेता की खूबसूरती से कम की गई ताकत!

1987 में बनी जोड़ी के जलवे में चलेगी सरकार ।

समर्थक मायूस फिर भी राजनाथ नई भूमिका के लिए तैयार ।

कृष्ण कुमार द्विवेदी (राजू भैया)
9415156670

आखिरकार वही हुआ जो देश सोच रहा था। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के चुनाव जीतने के बाद ही लगभग तय हो गया था कि देश के गृहमंत्री वही बनेगे। और वही हुआ भी। पूर्व गृहमंत्री एवं उत्तर भारत तथा देश के ताकतवर नेता राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्री के पद पर संतोष करना पड़ा! फिलहाल सियासी हल्कों में कहा जा रहा जा रहा है कि यह श्री सिंह पर कूटनीतिक प्रहार है? यहां श्री मोदी पहले सरकार हैं तो दूजे अमित शाह सरकार!
देश में गठित मोदी सरकार में मंत्री बनाए गए नेताओं को विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। इस दौरान जनता का ध्यान रक्षा मंत्री बनाए गए उत्तर भारत के एवं देश के ताकतवर नेता राजनाथ सिंह की ओर कुछ ज्यादा ही जा पहुंचा है । श्री सिंह इससे पहले कि मोदी सरकार में गृहमंत्री के पद पर थे। उन्हें उक्त सरकार में नंबर दो की हैसियत प्राप्त थी। इस बार चुनाव परिणाम आने के बाद जब अमित शाह चुनाव जीते इसकी चर्चाएं तेज हो गई थी अब गठित होने वाली मोदी सरकार टू में गृह मंत्री का पद शाह को ही मिलेगा। फिलहाल कल शपथ ग्रहण समारोह में राजनाथ सिंह के तत्काल मोदी के बाद शपथ लेने को राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे उनकी हैसियत नंबर दो पर आका था ।लेकिन 24 घंटे बीतने से पहले ही यह सारा आकलन मिथ्या साबित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री का पद अपने प्रिय दोस्त भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सुपुर्द कर दिया। अर्थात अब वह मोदी सरकार टू में दूसरे नंबर के सरकार होंगे?वर्ष 1987 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह की जो दोस्ती प्रारंभ हुई वह आज तक जारी है। राजनीतिक क्षेत्र में आज उपरोक्त दोनों वरिष्ठ करिश्माई नेताओं को एक दूसरे का पूरक माना जाता है। वर्ष 2009 में लालकृष्ण आडवाणी जी के राजनैतिक अवसान के प्रारंभ होने के उपरांत यह जोड़ी धीरे-धीरे भाजपा के शीर्ष पर काबिज होने के लिए आगे बढ़ने लगी। देखते ही देखते आज अटल आडवाणी मुरली मनोहर की भाजपा पर नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह की जोड़ी का राज हो गया।चर्चाओं के मुताबिक पिछली मोदी सरकार में भी भले ही राजनाथ सिंह देश के गृह मंत्री रहे हो लेकिन उन्हें खुलकर अपने हाथ खोलने के मौके कम ही मिले?लोग यह भी थे कि श्री सिंह को कहीं ना कहीं बहुत ही विषम परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। यह चर्चा सुनने को मिलती थी कि राजनाथ सिंह मोदी सरकार में बस नाम के ही ग्रह मंत्री हैं। लेकिन दूसरी ओर अत्यंत गंभीर राजनाथ सिंह ने कभी भी ऐसे किसी मुद्दे को कोई हवा नहीं दी। वह पूरी जिम्मेदारी के साथ मंत्रालय का काम करते रहे ।उत्तर भारत के उनके समर्थक तथा देश के कोने कोने में रहने वाले उनके अपने इस बात से संतुष्ट थे कि वह मोदी सरकार में नंबर दो की हैसियत वाले नेता है। परंतु आज मोदी सरकार में यह स्थिति राजनाथ समर्थकों की आंखों से ओझल हो गई है।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह कहीं ना कहीं राजनाथ सिंह पर एक ऐसा सियासी कूटनीतिक प्रहार है जिसके नतीजे दिन-ब-दिन सामने आते नजर आएंगे? बिना लाग लपेट की बात है कि राजनाथ सिंह का कद कहीं ना कहीं कम किया गया है! भले ही भाजपा के कुछ लोगों का यह कहना हो कि श्री सिंह को रक्षा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय में गृह मंत्रालय बड़ा विभाग है।प्रधानमंत्री मोदी के बाद अमित शाह सरकार के कर्ताधर्ता होंगे! जब भी श्री मोदी विदेश दौरे पर रहेंगे तब देश की कमान शाह के हाथों में होगी। हां यह जरूर है कि राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।चर्चाओं के मुताबिक यह भी कहा जा रहा है कि अब पूरी सरकार अघोषित रूप से गुजरातियों की सरकार हो गई है ?वैसे यह कहना एक छोटी सोच की बात होगी। फिर भी राजनाथ सिंह के समर्थक बातचीत में यह बात कह ही डालते हैं। राजनाथ को रक्षा मंत्री बनाने की पीछे शायद यह वजह भी हो कि मोदी सरकार को आने वाले समय में मोदी एवं अमित शाह की सरकार के रूप में याद किया जाए। वैसे भी पूर्व की मोदी सरकार में यदि प्रधानमंत्री समेत चार पांच मंत्रियों को छोड़ दिया जाए तो बाकी बनाए गए मंत्री बस नाम के ही मंत्री साबित हुए थे।राजनीतिक सूत्रों की माने तो उनका कहना है कि राजनाथ से गृह मंत्रालय लेकर उनकी कद को कम किया गया है। उन्हें भले ही कल के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद शपथ ग्रहण करने के लिए बुलाया गया हो। भाजपा के कई लोगों का कहना है कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि राजनाथ सिंह देश के रक्षा मंत्री हैं ना कि गृहमंत्री। क्योंकि पूरी भाजपा में अब नरेंद्र मोदी और अमित शाह का युग चल रहा है। कई राजनाथ समर्थक भाजपा के नेताओं ने तो यहां तक कह डाला कि पहले भी इस जोड़ी ने भाजपा के कई बड़े नेताओं का निपटा कर मार्गदर्शक मंडल में शामिल कर दिया है ।अब इस जोड़ी के सामने केवल राजनाथ सिंह ही एक ऐसी चुनौती हैं जो उनके लिए भविष्य में कभी भी बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं! यही वजह है कि श्री सिंह के कद को बड़ी खूबसूरती से कम किया गया! ऐसे में राजनाथ सिंह को इन दोनों से समन्वय बनाकर के चलना ही होगा। समर्थक मायूस हैं लेकिन धीर- गंभीर एवं पार्टी तथा संगठन के प्रति समर्पित राजनाथ सिंह अपनी नई जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं!!

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