गाय हिन्दू भाइयों के लिये पूज्यनीय हैं हमें उनकी आस्था का पूरा ख्याल रखना चाहिये ,मोब्लिंचिंग बंद हो,सरकार बनाए कानून ,इस्लाम किसी की भावना को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं देता है

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पिछले सालों में, यानी 2010 से 2018 के बीच, गौ-रक्षा के नाम पर हिंसा की 63 घटनाएं सामने आईं, जिनमें से डॉटा जर्नलिज़्म की जानी-मानी संस्था इंडिया स्पेंड के मुताबिक़, 97 फ़ीसद या 61 वारदात मई 2014 के बाद हुए जब नरेंद्र मोदी ने केंद्र में प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता की बागडोर संभाली.

खालिद शेख कहते है कि “गाय हमारे हिन्दू भाइयों के लिये पूज्यनीय हैं हमें उनकी आस्था का पूरा ख्याल रखना चाहिये गाय के नाम पे मॉब लिन्चिंग बन्द होनी चाहिये सरकार सख्त से सख्त कानून बनाये न गाय मारी जाये न गाय के नाम पे इन्सान मारे जाये मेरा मजहब इस्लाम किसी की भावना को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं देता है”

इन हमलों की तादाद कुछ इस तेज़ी से बढ़े हैं कि ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी ने पहले अगस्त 2016 और फिर जून 2017 में न सिर्फ़ कथित गौ-रक्षकों को असमाजिक तत्व क़रार दिया बल्कि ये भी कहा कि गांधी जी ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करते.

लेकिन फ़िलहाल प्रधानमंत्री की बात का बहुत असर दिख नहीं रहा – साल 2017 के पहले छह माह में गौ-रक्षा के नाम पर 20 हिंसक वारदातें सामने आई हैं, जोकि इंडिया स्पेंड के मुताबिक़ 2016 का 75 फ़ीसद हैं – वो 2016 जो पिछले सात सालों में गौ-रक्षा के नाम पर हुई हिंसा का सबसे ख़राब साल रहा है.

ये प्रधानमंत्री के लिए सोचने की बात है कि आख़िर उनकी बात कथित गौ-रक्षकों तक क्यों नहीं पहुंची और क्या ज़रूरत है अपने कहने के अंदाज़ को बदलने की या किसी ऐसे कड़े क़दम की ताकि ये बात उनतक पहुंच सके जिनको वो पहुंचाने की बात कह रहे हैं.

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