सवर्णों को आरक्षण देने पर तिलमिलाए असदुद्दीन ओवैसी बोले, संविधान इसकी इजाजत नहीं देता

मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को सरकारी नौकरियों में 10 फ़ीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. सरकार इसके लिए जल्द ही संविधान में बदलाव करेगी. वहीं सरकार के इस फैसले पर सियासी घमासान मचा हुआ है. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी इसे लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है.

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि आरक्षण दलितों के साथ ऐतिहासिक अन्याय को सही करने के लिए है. गरीबी मिटाने के लिए कोई भी कई योजनाएं चलाई जा सकती हैं, लेकिन आरक्षण न्याय के लिए बना है. संविधान आर्थिक आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है.

बता दें कि मोदी सवर्णों को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने के लिए इसके लिए जल्द ही संविधान में बदलाव करेगी. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव किया जाएगा. दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा.

जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार कल संविधान में संशोशन प्रस्ताव लाएगी. बता दें कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी के पारम्परिक वोटबैंक में नाराजगी देगी गयी है. जिससे जोड़कर इस फैसले को देखा जा रहा है.

बता दें कि एससी-एसटी बिल को लेकर सवर्ण समाज में मोदी सरकार के प्रति जबरदस्त नाराजगी देखी गयी. इसे लेकर देश में जगह- जगह प्रदर्शन भी हुआ. कई गाँवो में बीजेपी नेताओं के घुसने पर पाबंदी के पोस्टर भी लगे पाए गए. सवर्णों वोटरों की नाराजगी का नतीजा है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सभी समीकरण बिठाने के बाद भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. इन चुनावों में सवर्णों ने एकजुट होकर नोटा दबाया जिसका फायदा कांग्रेस को हुआ. मोदी सरकार ने सवर्णों की नाराजगी को भांपते हुए आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए आरक्षण को मंजूरी दी है.

किन्हें मिलेगा लाभ?

जिस व्यक्ति के पास तय सीमा से अधिक संपत्ति होगी, उसे इस संशोधन का लाभ नहीं मिल पाएगा. सूत्रों की मानें तो ये आरक्षण 8 लाख सालाना आमदनी और 5 एकड़ से कम जमीन वाले सवर्णों को मिल सकता है. इसके अलावा जिनके पास सरकारी जमीन (DDA, निगम की जमीन) पर अपना मकान होगा, उन्हें भी इसका लाभ नहीं मिल पाएगा.

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