दतिया उपचुनाव के नतीजे से पहले कांग्रेस ने पार्टी के पूर्व MLA को किया सस्पेंड, जानें क्या है पूरा मामला
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस…
<span class="img-name">कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को पार्टी से किया निलंबित </span> <span class="img-source">Image Source : FACEBOOK </span>
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस ने यहां के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी ने निलंबित कर दिया है। राजेंद्र भारती ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी और वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी की थी।
पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित
अनुशासनहीनता और पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करने के गंभीर आरोपों के चलते कांग्रेस आलाकमान ने कड़ा कदम उठाते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। निलंबन का यह आदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से जारी किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान संपन्न हुआ था और 3 अगस्त को मतों की गिनती होनी है। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह ने पार्टी हाईकमान को एक लिखित शिकायत भेजी थी। शिकायत में कांग्रेस प्रत्याशी ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर गंभीर भितरघात और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। कुंवर घनश्याम सिंह का आरोप था कि राजेंद्र भारती ने पार्टी को हरवाने के लिए बीजेपी से फंडिंग ली और सोची-समझी साजिश के तहत कांग्रेस के खिलाफ काम किया। प्रत्याशी ने उन्हें पार्टी से पूरी तरह निष्कासित करने की मांग की थी, जिसके बाद संगठन ने यह कार्रवाई की है।
राजेंद्र भारती का पलटवार
दूसरी ओर राजेंद्र भारती ने निलंबन और आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा था कि घनश्याम सिंह संभावित हार के डर से इस तरह की अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने उल्टा आरोप मढ़ते हुए कहा कि घनश्याम सिंह ने स्वयं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सहमति से चुनाव लड़ा है और उनके पूरे चुनावी फंड मैनेजमेंट में भी बीजेपी से जुड़े लोगों की ही मुख्य भूमिका रही है।
परिणामों से ठीक पहले हुए इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और गुटबाज़ी ने दतिया के सियासी पारे को और बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं।

