अयोध्या : मवई में नमामि गंगे परियोजना की हुई शुरुवात

नदियों के प्रदूषण व कटान को रोकने के लिए शासन द्वारा शुरू की गई ये परियोजना,रेंजर ओम प्रकाश ने बताया इस परियोजना के तहत नदियों के किनारे बांस घास व पौधों का होगा रोपण,डिप्टी रेंजर सैय्यद ततहीर अहमद ने बताया कि रुदौली वन क्षेत्र के रेछ गांव से हुई परियोजना की शुरुवात।

मवई(अयोध्या) ! यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की महत्वपूर्ण योजना 22 करोड़ पौधरोपण अभियान की तैयारी में प्रदेश के सभी विभाग लगे हुए है।इसके लिए तैयार किए गए माइक्रोप्लान के हिसाब से सभी विभाग अपने अपने लक्ष्य के मुताविक पौधरोपण कर रहे है।हालांकि इसका महा अभियान 15 अगस्त को चलेगा।जिसकी तैयारी पूरे जोर शोर से चल रही है।वह महोत्सव मनाने के बाद अयोध्या वन प्रभाग के अधिकारियों ने भी अपनी कमर कस ली है।लेकिन विकास विभाग अर्थात ब्लॉक के कर्मियों व प्रधानों पर इस महा अभियान का असर बिल्कुल भी नही दिख रहा है।फिरहाल इसी महाअभियान में सामिल नमामि गंगे परियोजना को भी सफल बनाना है।जिसके लिए वन विभाग एड़ी से चोटी तक का दम लगाए हुए है।रुदौली वन क्षेत्र अन्तर्गत मवई के रेछ गांव में इस परियोजना की शुरुवात भी कर दी गई है।
बता दे कि रुदौली वन क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे नमामि गंगे परियोजना का शुभारंभ किया गया है।रुदौली वन क्षेत्राधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि रुदौली रेंज में कुल लगभग आठ लाख पौधों का रोपण होना है।जिसमें से लगभग चार लाख पौधों का लक्ष्य वन विभाग को मिला।शेष दो लाख ब्लॉक स्तर से व दो लाख ग्रामीण व अन्य विभाग रोपित करेंगे।वन विभाग को मिले लक्ष्य में ही नमामि गंगे परियोजना सामिल है।इस परियोजना के तहत मवई क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे तीन अलग अलग साइडों में दस दस हेक्टेयर भूमि पर घांस बांस व पौधों का रोपण होना है।इन्होंने बताया नदियों के किनारे घांस बोने के साथ ही इस परियोजना की शुरुवात हो गई।डिप्टी रेंजर सैय्यद ततहीर अहमद व बीट प्रभारी अरविन्द मिश्र ने बताया कि वास्तव नमामि गंगे परियोजना का कार्य पूरा होने के बाद गोमती नदी के किनारे लोगों को एक अनोखी प्राकृतिक छटा देखने को मिलेगी।इन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि गोमती नदी के किनारे लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर 28500 पौधों का रोपण होना है।जिसमें घनाकार छायाकार कीमती इमारती लकड़ी वाले पौधों के साथ साथ फलदार व कटीले पौधों का रोपण होना है।इसको एक विशेष तरीके से डिजाइन किया गया है।पहले घांस फिर बांस उसके बाद पौधे इसी क्रम रोपित करना है।इसके लिए एक निश्चित दूरी भी तय की गई है।एक मीटर घास फिर बांस फिर साढ़े तीन मीटर की दूरी पर पौध रोपित करनी है।इन्होंने बताया कि डीएफओ मनोज खरे के निर्देशन में व रेंजर ओमप्रकाश की देखरेख में परियोजना की शुरुवात करते हुए घास की बुवाई का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।और बीच बीच मे कुछ बांस व पौधों को भी रोपित किया गया है।

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