करेरू कांड : दलित परिवार में तीन मौतों के बाद भी नहीं थमा कहर, शोक में डूबे परिवार पर मुकदमे का बोझ
किरिया कर्म के बीच बेटों पर दहेज केस,परिवार के बेटे अंतिम संस्कार में भी नहीं हो सके शामिल,पुलिस कार्रवाई से गांव में आक्रोश,ग्रामप्रधान ने कहा यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

अयोध्या ! रौनाही थाना क्षेत्र के करेरू गांव में घटित हृदयविदारक घटनाक्रम के बाद दलित परिवार के मुखिया पाटनदीन पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप उठती है। बहू, बेटे और मासूम पोते की 12 घंटे के अंदर हुई मौत के बाद भी परिवार को राहत नहीं मिल सकी है, बल्कि हालात और अधिक पीड़ादायक हो गए हैं।शुक्रवार को बेटे और बहू के अंतिम संस्कार के बाद पाटनदीन किरिया कर्म में बैठे थे, लेकिन उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह अपने मृत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए ठीक से कर्मकांड भी नहीं कर पा रहे थे कि तभी एक और वज्रपात हो गया।

उनका आरोप है कि दाह संस्कार के बाद कलाफरपुर घाट से रौनाही पुलिस उनके बेटों अवधेश और सदानंद को अपने साथ ले गई और थाने में बैठाए रखी। दोनों बेटे अपने ही भतीजे, यानी मृत मासूम बच्चे के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके। इस पीड़ा ने परिवार के जख्मों को और भी गहरा कर दिया। पाटनदीन ने रोते-बिलखते बताया कि जब दोनों बेटे घर नहीं लौटे तो उन्होंने उनकी तलाश शुरू की। शनिवार सुबह थाने पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि मृतका की मां सुमित्रा की तहरीर पर उनके बेटों के खिलाफ दहेज का मुकदमा दर्ज किया गया है और अब जमानत फैजाबाद से करानी होगी। यह सुनते ही वह फूट-फूटकर रो पड़े।

फाइल फोटो : दलित मृतक दम्पत्ति शिवानंद व संजू रावत
हालांकि रौनाही थाना प्रभारी लाल चंद्र सरोज ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है, लेकिन किसी की गिरफ्तारी से साफ इंकार किया है।इधर, इस पूरे घटनाक्रम से गांव में भारी आक्रोश व्याप्त है।ग्राम प्रधान गिरिजेश त्रिपाठी ने पुलिस कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए कहा कि जिस परिवार ने एक साथ तीन-तीन अपनों को खो दिया हो, वहां इस तरह की कार्रवाई करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को इस दुख की घड़ी में परिवार को सहारा देना चाहिए था,न कि उनके जख्मों पर नमक छिड़कना चाहिए।लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को तत्काल राहत देने की मांग की है।
गम में डूबे करेरू गांव के कई घरों में नहीं जले चूल्हे
अयोध्या ! शुक्रवार को एक ही परिवार में पति-पत्नी की जलती चिताएं और नवजात मासूम समेत तीन मौतों की दर्दनाक घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया। इस हृदय विदारक घटना के बाद न सिर्फ परिजन बल्कि आसपास के ग्रामीण भी शोक में डूबे है।गांव में हर ओर सन्नाटा पसरा है और लोगों की आंखें नम हैं।ग्राम प्रधान गिरजेश त्रिपाठी व भाजपा मंडल उपाध्यक्ष अवनीश तिवारी ने बताया कि इस तरह की भयावह घटना न कभी गांव में और न ही आसपास के क्षेत्र में हुई। एक साथ तीन मौतों ने सभी को भीतर तक झकझोर दिया है।आलम ये रहा कि गांव के कई घरों में शुक्रवार की शाम चूल्हे नहीं जले। लोगों का मन इतना व्यथित है कि किसी का खाने-पीने में भी ध्यान नहीं लग रहा।
दूसरे दिन भी नहीं थमा सिसकियों का सिलसिला
अयोध्या ! एक ही परिवार में पति-पत्नी और नवजात मासूम की दर्दनाक मौत के बाद गांव में पसरा मातम शनिवार को भी कम नहीं हुआ। पूरे इलाके में शोक और सन्नाटे का ऐसा मंजर है कि हर चेहरा गमगीन नजर आ रहा है। पाटनदीन के घर पर सुबह से देर शाम तक रिश्तेदारों, हित्र-मित्रों और ग्रामीणों का तांता लगा रहा।जो भी पहुंचा, उसकी आंखें नम थीं और जुबान पर सिर्फ संवेदना के शब्द। घर के आंगन में पसरी खामोशी और बीच-बीच में उठती सिसकियां इस बात की गवाही दे रही थीं कि यह दर्द कितना गहरा है। मासूम की असमय मौत ने इस त्रासदी को और भी असहनीय बना दिया है।ग्रामीणों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन हर किसी के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है,कि आखिर इस परिवार पर इतनी बड़ी विपत्ति क्यों टूटी..? हमेशा खुश दिखने वाली विवाहिता संजू ने आखिर इतना खौफनाक कदम क्यों उठा लिया..?
दलित परिवार की त्रासदी पर नेताओं की बेरुखी से उठे सवाल
अयोध्या ! करेरू गांव निवासी दलित पाटनदीन रावत के घर हुई हृदयविदारक त्रासदी ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। जवान बेटे, बहू और मासूम पोते की मौत से टूटे परिवार को ढांढस बंधाने के लिए गांव व आसपास के लोग लगातार पहुंच रहे हैं। हर कोई इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ा नजर आ रहा है।हालांकि हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं दिखी। ग्राम प्रधान को छोड़कर न तो कोई सांसद, विधायक और न ही अन्य नेता पीड़ित परिवार के दरवाजे शनिवार की शाम तक पहुंचा।इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और वे इसे संवेदनहीनता मान रहे हैं।
मासूम की मौत पर उठे गंभीर सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी सच्चाई
अयोध्या ! रौनाही थाना क्षेत्र के करेरू गांव में हुई त्रासदी के बाद मासूम बच्चे की मौत को लेकर रहस्य और गहराता जा रहा है। जहां एक ओर पूरे गांव में मातम पसरा है, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन और ग्रामीण बच्चे की मौत को लेकर अलग-अलग आशंकाएं जता रहे हैं।थाना प्रभारी लालचंद सरोज ने बताया कि अभी मासूम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है।रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक तौर पर डिहाइड्रेशन या भूख की वजह से भी मौत होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चा करीब तीन घंटे तक कमरे में बंद रहा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पुलिस द्वारा दरवाजे का ताला तोड़कर पिता के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, तो उसी दौरान कमरे में पड़े मासूम को तत्काल इलाज के लिए क्यों नहीं भेजा गया।घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बच्चे को अस्पताल पहुंचाया जाता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी।

