भागवत महात्म्य की गूंज, दुंदुभी और परीक्षित जन्म प्रसंग से श्रद्धालु भाव-विभोर
पांच पावन कन्याओं के स्मरण से संकट हरने का बताया दिव्य उपाय,कलियुग में कल्कि अवतार, दया-दान और भक्ति के महत्व पर व्यास जी का संदेश

अयोध्या : पटरंगा मंडी स्थित गायत्रीनगर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथा व्यास पंडित उमेश शास्त्री ने दूसरे दिन की कथा में भागवत महात्म्य, दुंदुभी प्रसंग तथा राजा परीक्षित के जन्म का विस्तार से वर्णन किया, जिससे कथा स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण और गहरा हो गया।
कथा व्यास ने बताया कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख शांति का संचार होता है।

दुंदुभी प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब ईश्वर विभिन्न रूपों में प्रकट होकर धर्म की स्थापना करते हैं।कथा के दौरान उन्होंने राजा परीक्षित के जन्म की कथा सुनाते हुए उनके जीवन से मिलने वाली शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने श्रीमद्भागवत में वर्णित पांच पवित्र कन्याओं अहिल्या, द्रौपदी, कुंती, तारा और मंदोदरी का स्मरण करने के महत्व को बताया और कहा कि इनके नाम लेने मात्र से मनुष्य के सभी संकट दूर हो जाते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि भगवान केवल भाव के भूखे होते हैं, इसलिए सच्ची श्रद्धा, दया और दान का जीवन में विशेष महत्व है।

कलियुग में भगवान के कल्कि अवतार के प्रभाव और महर्षि शुकदेव जी की वाणी का भी विस्तार से वर्णन किया गया।कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।इस अवसर पर मुख्य यजमान शशि मिश्रा सूर्यकांत मिश्र सुनील मिश्रा अवधेश गुप्ता गुड्डू गुप्ता पवन बंका शिवफेर तिवारी आलोक तिवारी रुचि मिश्रा शांति देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

