गौशाला निर्माण के नाम पर लाखों का खेल,मवई के भटमऊ में भुगतान के बाद भी अफसर बेखबर
जेसीबी से खाई खुदवाकर नौ लाख से अधिक निकाले, बीडीओ व सचिव को निर्माण स्थल की जानकारी नहीं,नेवरा में भी 14 लाख भुगतान के एक वर्ष बाद भी संचालित नहीं हो सका गौ-आश्रय केंद्र

मवई(अयोध्या) ! मवई ब्लॉक क्षेत्र की भटमऊ नारायनपुर ग्राम पंचायत के भिखारी सराय में गौ-आश्रय केंद्र के नाम पर कथित भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने करीब एक वर्ष पूर्व गौशाला निर्माण कार्य को दर्शाते हुए नौ लाख रुपये से अधिक की धनराशि निकाल ली, जबकि जमीनी हकीकत में केवल जेसीबी से एक खाई खुदवाई गई। न तो कोई स्थाई निर्माण हुआ और न ही गौ-आश्रय केंद्र संचालित हो सका।सबसे हैरानी की बात यह है कि वर्तमान बीडीओ भावना यादव और पंचायत सचिव गोविंद सिंह को यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं है कि गौ-आश्रय केंद्र आखिर बना कहां है।

सरकारी अभिलेखों में भुगतान हो चुका है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस संरचना नजर नहीं आती। यह स्थिति योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।भटमऊ ग्राम पंचायत के बनी गांव निवासी राजकुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायत कर जांच की मांग की, मगर मामला कथित रूप से जांच और औपचारिक रिपोर्ट तक ही सीमित रह गया।इन्होंने बताया पूर्व बीडीओ अनुपम वर्मा ने जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही थी, किंतु अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।गौरतलब है कि इससे पहले नेवरा ग्राम पंचायत में भी गौ-आश्रय केंद्र की स्थापना के नाम पर करीब 14 लाख रुपये का भुगतान ब्लॉक द्वारा किया गया,जबकि वहां भी गौशाला आज तक संचालित नहीं हो सका। मवई ब्लॉक में मनरेगा योजना में फर्जीवाड़े की खबरें पहले ही सामने आ चुकी हैं।ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बिना निर्माण के भुगतान कैसे हो गया और जिम्मेदार तंत्र को इसकी जानकारी तक क्यों नहीं है? अफसर भी इसे जानते हुए अनदेखी कर रहे है।मवई की खंड विकास अधिकारी भावना यादव ने बताया भटमऊ ग्राम पंचायत में कोई गौशाला का निर्माण नही है।कई बार कहने के बावजूद वो सत्य को नकारती रही।

